Sunday, June 3, 2018

बाजार ने गंवाई पूरी बढ़त, सेंसेक्स 25 अंक टूटा, निफ्टी 10700 के नीचे फिसला, बैंकिंग शेयर लुढ़के

तेज शुरुआत के बाद बाजार में ऊपरी स्तरों से गिरावट हावी हो गई है। हैवीवेट शेयरों एचडीएफसी बैंक, टीसीएस, एचयूएल, ओएनजीसी, एचडीएफसी, आईटीसी और मारुति में कमजोरी से सेंसेक्स ने पूरी बढ़त गंवा दी है। वहीं निफ्टी 10700 के करीब आ गया है। बिकवाली के दबाव में सेंसेक्स ऊपरी से 378 प्वाइंट्स गिर गया है, जबकि निफ्टी ऊपर से 80 अंक टूटा है। एनएसई पर सभी सेक्टोरल इंडेक्स गिरे हैं। सबसे ज्यादा गिरावट बैंकिंग, रियल्टी और एफएमसीजी शेयरों में आई है।

मिडकैप-स्मॉलकैप शेयर लुढ़के
शुरुआती तेजी के बाद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में दबाव देखने को मिल रहा है। बीएसई का मिडकैप इंडेक्स सपाट कारोबार कर रहा है, जबकि निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.07 फीसदी टूट गया है। वहीं बीएसई के स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.37 फीसदी की गिरावट आई है।

बैंक, रियल्टी इंडेक्स गिरे, मेटल-फार्मा में बढ़त

कारोबार के दौरान सेक्टोरल इंडेक्स में एनएसई पर बैंक और रियल्टी इंडेक्स में कमजोरी दिख रही है। बैंक निफ्टी 0.22 फीसदी टूटकर 26,632.95 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में 0.77 फीसदी और फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.26 फीसदी की गिरावट आई है। पीएसयू बैंक इंडेक्स 0.16 फीसदी गिरा है।

हालांकि निफ्टी ऑटो इंडेक्स 0.22 फीसदी, मेटल इंडेक्स 0.45 फीसदी और फार्मा इंडेक्स 0.78 फीसदी बढ़ा है।

RBI के फैसले पर बाजार की नजर
मॉनिटरी पॉलिसी को लेकर आरबीआई की 3 दिनों तक चलने वाली मीटिंग 4 जून से शुरू हो रही है। जानकारों का मानना है कि मीटिंग में बढ़ती महंगाई, क्रूड की बढ़ती कीमतों के अलावा चौथी तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ 7.7 फीसदी रहना बड़े फैक्टर होंगे, जिनपर 6 सदस्यों वाली मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी की नजर होगी। कुछ रिपोर्ट इशारा करती हैं कि इस बार आरबीआई ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला ले सकता है, वहीं कुछ रिपोर्ट के अनुसार ब्याज दरें बढ़ाने के लिए सेंट्रल बैंक अभी कुछ और इंतजार कर सकता है। 

ग्लोबल ट्रेड वार बढ़ा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यूरोपियन यूनियन और कनाडा समेत अन्य देशों पर स्टील और एल्युमीनियम प्रोडक्ट पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ा दी है। यूरोपियन यूनियन ने जवाबी कार्रवाई में ट्रम्प प्रशासन के फैसले को वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (WTO) में चुनौती दी है। कनाडा भी अमेरिका के खिलाफ डब्ल्यूटीओ में चला गया है। इससे ग्लोबल स्तर पर ट्रेड वार की शुरुआत हो गई है जिसका असर शेयर बाजार पर पड़ेगा।

क्रूड प्राइस पर नजर
मई में ब्रेंट क्रूड 80.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। हालांकि फिलहाल इसमें 4.6 फीसदी का करेक्शन हो चुका है औऱ ब्रेंट क्रूड का भाव 76.79 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने का ऑयल इम्पोर्टिंग इकोनॉमी पर असर पड़ता है। भारत क्रूड का बड़ा इम्पोर्टर है, ऐसे में करंट अकाउंट डेफिसिट, फिस्कल डेफिसिट, इम्पोर्टेड इंफ्लेशन पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा जो इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए हेडविंड बन सकता है। 

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